➤ नेपाल-चीन बॉर्डर पर भीषण बाढ़, फ्रेंडशिप ब्रिज बहा
➤ 40 किलोमीटर सड़क और 19 पुल बाढ़ की चपेट में आए
➤ नेपाल में 16 मौतें, 105 भारतीयों समेत सैकड़ों लोग लापता
नेपाल-चीन सीमा पर बुधवार को आई भयंकर बाढ़ और भूस्खलन ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी। रसुवा के सीमावर्ती इलाकों से लेकर चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र के ग्यिरोंग पोर्ट तक अचानक आई तेज जलधारा ने सड़क, पुल, इमारतों और अन्य बुनियादी ढांचे को अपनी चपेट में ले लिया। सोशल मीडिया और आधिकारिक वीडियो में पानी की प्रचंड धारा के सामने सीमावर्ती इलाके में बने ढांचे कुछ ही पलों में बहते दिखाई दे रहे हैं।
आजतक की रिपोर्ट के अनुसार नेपाल-चीन बॉर्डर के केरुंग क्षेत्र में बाढ़ की प्रचंड धारा ने एक बड़े कस्टम कार्यालय को भी बहा दिया। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस आपदा में नेपाल में मौतों का आंकड़ा 16 तक पहुंच गया है और 105 भारतीयों के लापता होने की बात सामने आई है। हालांकि अलग-अलग समय पर जारी रिपोर्टों में मृतकों और लापता लोगों की संख्या अलग बताई गई है, इसलिए राहत एवं बचाव अभियान के बीच आंकड़े बदल सकते हैं।
कुछ ही सेकंड में पानी की धारा में समा गया पूरा ढांचा
आपदा की भयावहता का अंदाजा वायरल और आधिकारिक वीडियो से लगाया जा सकता है। पानी की रफ्तार अचानक इतनी तेज हुई कि सीमावर्ती क्षेत्र में मौजूद भारी-भरकम ढांचे भी उसके सामने टिक नहीं सके। आजतक के मुताबिक कैमरे में कैद फुटेज में लगभग छह-सात मंजिल के बराबर दिखने वाला ढांचा कुछ ही सेकंड में पानी के साथ बहता नजर आया।
यह इलाका नेपाल और चीन के बीच व्यापार तथा आवागमन के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इसी मार्ग से चीन से नेपाल में कंटेनर पहुंचते हैं और कैलाश-मानसरोवर यात्रा के लिए जाने वाले यात्रियों का भी आवागमन होता है। ऐसे में इस आपदा ने सिर्फ स्थानीय आबादी ही नहीं, बल्कि सीमा पार व्यापार और यातायात को भी प्रभावित किया है।

40 किलोमीटर सड़क बहने और 19 पुल टूटने की रिपोर्ट
बाढ़ की ताकत का असर पूरे परिवहन नेटवर्क पर पड़ा है। आजतक की रिपोर्ट में करीब 40 किलोमीटर सड़क बहने और 19 पुलों के टूटने की जानकारी दी गई है। नेपाल के सड़क विभाग के अनुसार भी बेट्रावती से रसुवागढ़ी सीमा तक करीब 42 किलोमीटर सड़क बाढ़ से क्षतिग्रस्त हुई है और कई कंक्रीट पुल बह गए हैं।
नेपाल के अधिकारियों के अनुसार बाढ़ से रसुवा के तिमुरे, स्याब्रूबेसी और आसपास के इलाकों में व्यापक नुकसान हुआ है। कई जगह सड़क संपर्क टूट गया है और प्रभावित क्षेत्रों में राहत पहुंचाना मुश्किल हो रहा है।
भोटे कोशी नदी ने मचाई तबाही
नेपाल के रसुवा जिले में भोटे कोशी नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने के बाद बाढ़ ने भयावह रूप ले लिया। नदी के किनारे बसे इलाकों में पानी तेजी से घुसा और घरों, वाहनों तथा दूसरी संपत्तियों को अपने साथ बहा ले गया। अधिकारियों ने नदी के किनारे रहने वाले लोगों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी है।
नेपाल की सेना, सशस्त्र पुलिस बल और नेपाल पुलिस को राहत एवं बचाव अभियान में लगाया गया है। बुधवार दोपहर तक दर्जनों लोगों को बचाए जाने की रिपोर्ट सामने आई थी और कई हेलीकॉप्टरों को खोज एवं बचाव अभियान में लगाया गया। हालांकि तेज पानी और खराब परिस्थितियों के कारण हेलीकॉप्टरों के संचालन में भी दिक्कतें आ रही हैं।

चीन के ग्यिरोंग पोर्ट पर भी भूस्खलन, संचार और बिजली प्रभावित
सीमा के दूसरी ओर चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में स्थित ग्यिरोंग पोर्ट के पास भी भूस्खलन हुआ। चीनी सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार भूस्खलन से पोर्ट तक जाने वाली सड़क बंद हो गई और संचार तथा बिजली आपूर्ति भी प्रभावित हुई। ड्रोन फुटेज में प्रभावित इलाके में मलबे से दबी इमारतें दिखाई देने की जानकारी भी सामने आई है।
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने लापता लोगों की तलाश और बचाव के लिए हरसंभव प्रयास करने के निर्देश दिए हैं। चीन की ओर से प्रभावित सीमावर्ती क्षेत्र में पीपुल्स आर्म्ड पुलिस के 145 अधिकारियों और जवानों को भेजे जाने की जानकारी आजतक ने दी है।
आपदा की वजह अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं
इस अचानक आई बाढ़ की सटीक वजह अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हुई है। प्रारंभिक आकलनों में भूस्खलन या बर्फ-चट्टान के अचानक खिसकने से नदी के प्रवाह में रुकावट और उसके बाद अचानक पानी टूटने की आशंका जताई गई है। विशेषज्ञों ने ग्लेशियल झील के फटने की संभावना को भी पूरी तरह खारिज नहीं किया है।

काठमांडू पोस्ट के अनुसार प्रारंभिक वैज्ञानिक आकलन में नेपाल की ओर से हुए एक संभावित आइस-एवलॉन्च के कारण ल्हेंदे नदी के अवरुद्ध होने और उसके बाद पानी के अचानक नीचे की ओर आने की आशंका जताई गई है। हालांकि अंतिम कारण निर्धारित करने में अभी समय लगेगा।
बिजली उत्पादन पर भी बड़ा असर
बाढ़ और भूस्खलन ने नेपाल के ऊर्जा ढांचे को भी नुकसान पहुंचाया है। नेपाल के ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार करीब 430 मेगावाट बिजली क्षमता प्रभावित हुई है, जो देश की कुल जलविद्युत क्षमता का 12 प्रतिशत से अधिक है। इससे प्रभावित क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति और संचार व्यवस्था पर भी असर पड़ा है।

तलाश और राहत अभियान जारी, लापता लोगों की संख्या बढ़ने की आशंका
सीमा क्षेत्र में हालात अभी भी गंभीर बने हुए हैं। कई लोग लापता हैं और कुछ इलाकों तक राहत दलों की पहुंच मुश्किल है। नेपाल और चीन दोनों तरफ बचाव अभियान चलाया जा रहा है। अधिकारियों ने लोगों से नदियों के किनारे नहीं जाने और सुरक्षित ऊंचे स्थानों पर चले जाने की अपील की है।
सबसे बड़ी चिंता उन लोगों को लेकर है जिनसे अब तक संपर्क नहीं हो पाया है। शुरुआती रिपोर्टों में मृतकों और लापता लोगों की संख्या अलग-अलग सामने आ रही है। इसलिए अंतिम नुकसान का आकलन राहत और बचाव अभियान आगे बढ़ने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

पिछले साल भी इसी नदी ने मचाई थी तबाही
भोटे कोशी नदी क्षेत्र में पिछले साल भी इसी तरह की विनाशकारी बाढ़ आई थी। उस दौरान नेपाल-चीन को जोड़ने वाला फ्रेंडशिप ब्रिज क्षतिग्रस्त हुआ था और दोनों देशों के बीच व्यापार एवं परिवहन लंबे समय तक प्रभावित रहा था। उस घटना को बाद में तिब्बत में ग्लेशियल झील के फटने से जोड़ा गया था।

इस बार फिर उसी सीमा क्षेत्र में आई अचानक बाढ़ ने हिमालयी इलाकों की प्राकृतिक आपदाओं के प्रति बढ़ती संवेदनशीलता को सामने ला दिया है। फिलहाल राहत एजेंसियों का पूरा ध्यान लोगों की जान बचाने, लापता लोगों को खोजने और प्रभावित क्षेत्रों तक जरूरी सहायता पहुंचाने पर है।
भारतीय दूतावास ने जारी किए हेल्पलाइन नंबर
भारतीय नागरिकों की मदद और जानकारी के लिए काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास ने आपातकालीन नंबर जारी किए हैं। प्रभावित लोग +977 985 131 6807 और +977 970 910 7500 पर संपर्क कर सकते हैं।
नेपाल टूरिज्म बोर्ड ने भी मदद के लिए टोल-फ्री नंबर 1234, हॉटलाइन 1144 और टूरिस्ट पुलिस नंबर 9851289445 जारी किया है।
PM मोदी बोले- भारत हर संभव मानवीय मदद देने को तैयार
नेपाल में बाढ़ से हुई जनहानि पर प्रधानमंत्री मोदी ने दुख जताया है। उन्होंने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह से बात कर बाढ़ में जान गंवाने वाले लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इस मुश्किल समय में भारत नेपाल के लोगों के साथ मजबूती से खड़ा है।




